संसद में ‘जी राम जी बिल’ : रोजगार से पहले राम नाम की एंट्री, सांसद भट्ट का बयान हुआ वायरल

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भट्ट ने कहा अगर जिंदगी में कुछ भी अटका हो तो बस राम नाम का जाप कर लीजिए
सोशल मीडिया पर यूजर्स ले रहे हैं चटखारे
संसद के शीतकालीन सत्र में जहां केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में व्यस्त रही, वहीं लोकसभा के भीतर कही गई एक टिप्पणी ने पूरे सियासी विमर्श का रुख ही बदल दिया। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) — VB-G RAM G बिल, 2025 पर चर्चा के दौरान उत्तराखंड के नैनीताल से सांसद अजय भट्ट का बयान सामने आते ही संसद की बहस सोशल मीडिया तक जा पहुंची। उनका यह बयान न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना, बल्कि इंटरनेट पर भी तेजी से वायरल हो गया।
ग्रामीण रोजगार, आजीविका और नीति की बहस के बीच अचानक सदन में आध्यात्मिक समाधान की एंट्री हो गई। चर्चा के दौरान अजय भट्ट ने पूरे विश्वास के साथ बताया कि अगर जिंदगी में कुछ भी अटका हो—चाहे शादी, नौकरी, पारिवारिक कलह या फिर घर का माहौल—तो समाधान बेहद सरल है। बस राम नाम का जाप कर लीजिए, काम अपने आप निकल जाएगा। बयान ऐसा था कि रोजगार नीति की बहस कुछ देर के लिए ‘भक्ति-मार्ग’ पर चल पड़ी।
सांसद के इस बयान का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर पहुंचा, यूज़र्स ने भी देर नहीं लगाई। किसी ने इसे “आध्यात्मिक स्टार्टअप” बताया तो किसी ने तंज कसते हुए पूछा कि अब सरकारी योजनाओं के साथ मंत्र-जाप भी अनिवार्य कर दिया गया है क्या। ट्विटर (X) से लेकर फेसबुक तक मीम्स और व्यंग्यात्मक टिप्पणियों की बाढ़ आ गई।
इससे पहले ‘जी राम जी बिल’ को लेकर लोकसभा में माहौल पहले ही गर्म था। विपक्ष ने सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि नए नामों और नए नारों के पीछे पुरानी जिम्मेदारियों से बचा जा रहा है। विरोध इतना तेज हुआ कि सदन में नारेबाजी के साथ-साथ बिल की प्रतियां भी फाड़ी गईं। यानी रोजगार की बहस में हंगामा भी पूरा और ड्रामा भी भरपूर।
वहीं सरकार की ओर से बार-बार यही दोहराया गया कि बिल की मंशा साफ है और इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका को मजबूती देना है। हालांकि, अजय भट्ट के बयान के बाद यह सवाल भी उठने लगा कि रोजगार योजनाओं का असर ज़मीन पर दिखेगा या फिर आस्था के भरोसे छोड़ दिया जाएगा।
फिलहाल, VB-G RAM G बिल संसद से पास हो चुका है, लेकिन उससे ज्यादा चर्चा उस बयान की हो रही है जिसने नीति, आस्था और राजनीति को एक ही मंच पर ला खड़ा किया। संसद में रोजगार की बात हो रही थी, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस इस बात पर छिड़ गई कि अब समस्याओं का समाधान फाइलों से होगा या फिर मंत्रों से।
