देश में 117 से अधिक भाषाएं विलुप्त श्रेणी में, सरकार कर रही है संरक्षण की कोशिश

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भारत में विलुप्त हो रही भाषाओं को संरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार व्यापक प्रयास कर रही है। देश में वर्तमान में 117 से अधिक मातृभाषाएं विलुप्तप्राय श्रेणी में हैं। 10,000 से कम लोगों द्वारा बोली जाने वाली इन सभी मातृभाषाओं/भाषाओं के संरक्षण और दस्तावेजीकरण का कार्य केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय विलुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा और संरक्षण स्कीम (SPPEL) के तहत करेगा।

यह कार्य केन्‍द्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL), मैसूरु के माध्‍यम से सम्पादित किया जाएगा। योजना के प्रथम चरण में 117 मातृभाषाओं को चयनित किया गया है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना में देश में कुल 121 भाषाओं के बारे में जानकारी मिली है। इनमें से कई भाषाओं की अपनी अलग लिपियां हैं, जबकि कुछ साझा या क्षेत्रीय लिपि में लिखी जाती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय भी साहित्य अकादमी के माध्यम से 24 मान्यता प्राप्त भाषाओं के साथ-साथ अनेक जनजातीय और गैर-मान्यताप्राप्त भाषाओं में साहित्य, अनुवाद, शोध कार्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है। साहित्य अकादमी मौखिक एवं जनजातीय साहित्य के लिए विशेष केंद्र संचालित करती है तथा कम मान्यताप्राप्त भाषाओं पर काम करने वाले विद्वानों को भाषा सम्मान भी प्रदान करती है।

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