दो पैन कार्ड मामला: मजबूत दस्तावेजों के आगे नहीं टिके आजम खां के 18 गवाह, फिर जाना पड़ा जेल

दो पैन कार्ड मामले में सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को एक बार फिर जेल भेज दिया गया है। बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए 18 गवाहों के बावजूद अभियोजन के 9 गवाह और ठोस दस्तावेज़ अदालत को अधिक विश्वसनीय लगे। सोमवार को एमपी–एमएलए मजिस्ट्रेट शोभित बंसल ने 2019 में दर्ज इस केस का फैसला सुनाया।
अभियोजन के साक्ष्य हुए निर्णायक
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने आयकर अधिकारी विजय कुमार और वादी आकाश सक्सेना सहित नौ गवाह प्रस्तुत किए। अभियोजन के अनुसार, अब्दुल्ला आजम के नाम से पहला पैन कार्ड 2013 में और दूसरा 2015 में जारी हुआ, जिनमें जन्म तिथि अलग-अलग थी।
बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए सीए ने बहस के दौरान आयकर अधिकारी की दलील को स्वीकार कर लिया। यह स्वीकारोक्ति अभियोजन के लिए सबसे मजबूत आधार बन गई।
वीडियो कैसेट की दलील भी नहीं चली
बचाव पक्ष ने एक फोटोग्राफर को गवाह के रूप में पेश कर वीडियो कैसेट कोर्ट में दिखाई, लेकिन अभियोजन ने बताया कि जिस कंपनी के नाम पर वह वीडियो थी, वह उस समय भारत में मौजूद ही नहीं थी। अदालत ने अभियोजन की यह आपत्ति उचित मानी।
450 पन्नों में अदालत का विस्तृत फैसला
अभियोजन अधिकारी ने बताया कि केस का फैसला 450 पन्नों में दर्ज है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि किस तरह पिता के प्रभाव का इस्तेमाल कर अब्दुल्ला आजम के लिए दूसरा पैन कार्ड बनवाया गया।
बचाव पक्ष के तर्क नहीं चले
अदालत में यह स्थापित हो गया कि—
- किसी व्यक्ति के दो पैन कार्ड किसी भी परिस्थिति में नहीं बन सकते।
- यदि पैन कार्ड में कोई जानकारी गलत दर्ज हो, तो उसे सुधरवाया जा सकता है, लेकिन नंबर नहीं बदलता।
अभियोजन का कहना है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला को विधायक बनाने के उद्देश्य से दूसरा पैन कार्ड तैयार कराया गया।
पहले भी हो चुकी है सजा
इससे पहले जन्म प्रमाणपत्र में हेराफेरी के मामले में आजम खां, अब्दुल्ला आजम और तजीन फात्मा को सात-सात साल की सजा मिल चुकी है।
दस्तावेजी साक्ष्यों का तोड़ नहीं ढूंढ सके आजम खां
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज इतने मजबूत थे कि बचाव पक्ष के तर्क टिक नहीं पाए। अदालत ने इसे स्पष्ट रूप से माना कि अब्दुल्ला को समय से पहले विधायक बनाने की चाह में दूसरा पैन कार्ड बनवाया गया था।
