CDS का उत्तराखंड दौरा: गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों से राष्ट्रीय सुरक्षा पर संवाद

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भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) Anil Chauhan ने आज उत्तराखंड के श्रीनगर (गढ़वाल) स्थित Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University के चौरास परिसर में छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्होंने प्राचीन भारतीय सामरिक परंपराओं से लेकर आधुनिक युद्ध रणनीतियों तक का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया।

अपने संबोधन में CDS ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित अवधारणा नहीं है। इसे मजबूत बनाने में समाज के प्रत्येक वर्ग—शिक्षा, अनुसंधान, नीति-निर्माण और नागरिक जागरूकता—की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

उन्होंने भारत में सामरिक शोध की कमी की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि देश में प्राचीन काल से ही रणनीतिक चिंतन की सशक्त परंपरा रही है।

CDS ने कहा कि धनुर्वेद में व्यूह रचना, धनुर्विद्या और सेना संचालन का विस्तार से वर्णन मिलता है। वहीं अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति में राज्य संरक्षण, शक्ति संतुलन और कूटनीतिक रणनीतियों का गहन विश्लेषण किया गया है।

उन्होंने कहा कि Chanakya की रणनीतिक दृष्टि आज भी भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सोच में परिलक्षित होती है।

इतिहास के संदर्भ में CDS ने कहा कि मुगल काल के दौरान लगभग 800 वर्षों तक भारत की सामरिक सोच कमजोर पड़ी। वर्ष 1947 में देश को राजनीतिक स्वतंत्रता मिली, लेकिन मानसिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में समय लगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल पश्चिमी रणनीतियों पर आधारित योजनाएं दीर्घकालिक सफलता नहीं दे सकतीं। यदि हथियार, युद्ध नीति और रणनीति मौलिक एवं स्वदेशी हों, तभी स्थायी और निर्णायक सफलता संभव है।

CDS ने आधुनिक वैश्विक परिदृश्य में युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब पारंपरिक युद्धों के साथ-साथ इंटेलिजेंस, साइबर स्पेस और सूचना आधारित युद्ध की अहमियत तेजी से बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि भारत के सामने दो परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों की चुनौती है, जिन्होंने भारतीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया है। परमाणु संतुलन के कारण लंबा युद्ध कठिन है, लेकिन आतंकवाद, आंतरिक अस्थिरता और सीमा विवाद जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।

देश को दीर्घकालीन युद्ध की तैयारी के साथ-साथ छोटे, सटीक और “स्मार्ट वॉर” की रणनीति पर समान रूप से ध्यान देना होगा।

कार्यक्रम के अंत में CDS ने छात्रों के प्रश्नों के उत्तर दिए। राष्ट्रीय सुरक्षा पर हुई यह गंभीर, बौद्धिक और सार्थक चर्चा छात्रों में सामरिक सोच और राष्ट्रहित के प्रति नई जागरूकता विकसित करती नजर आई।