तुंगनाथ की समस्याओं के बहाने केदारनाथ के पूर्व विधायक ने हेली सेवाओं और पर्यटन अधिकारी को घेरा

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केदारनाथ के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता Manoj Rawat ने इशारों-इशारों में तुंगनाथ धाम की व्यवस्थाओं के बहाने केदारनाथ हेली सेवाओं में कथित धांधली और रुद्रप्रयाग के जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि रुद्रप्रयाग के जिला पर्यटन अधिकारी पिछले तीन वर्षों से केदारनाथ हेली सेवाओं के नोडल अधिकारी हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि रुद्रप्रयाग में जिला पर्यटन अधिकारी की पोस्टिंग वैसी ही मानी जा रही है, जैसी उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारियों के लिए गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण और उत्तराखंड अधिकारियों के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की पोस्टिंग मानी जाती है।

इससे पहले अभिनेता हेमंत पांडे भी केदारनाथ हेलीकॉप्टर टिकटों को लेकर गंभीर सवाल उठा चुके हैं। हेमंत पांडे ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में आरोप लगाया था कि आम श्रद्धालुओं को समय पर टिकट उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि टिकट बुकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और आम यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा था – चारधाम यात्रा के पीछे जो घोटाले का जाल फैल रहा है एक बड़े तंत्र के रूप में ये काफी डराने वाला है। हमारी एक सिनियर एक्ट्रेस ने 15 अप्रैल को चारधाम यात्रा के लिए हेली बुकिंग खुलने के समय में उन्होंने बुकिंग करना चाहा लेकिन एक मिनट में ही सभी टिकटें फुल हो गई थीं।

उन्होंने आगे कहा- ये किसने बेचा, कौन खरीद रहा है? कौन इसमें कमिशनखोरी कर रहा है ? उन्होंने इसकी जांच की मांग भी की थी।

हेमंत पांडे के आरोपों के बाद प्रदेश सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि केदारनाथ हेली सेवाओं के टिकटों की बुकिंग अधिकृत ऑनलाइन प्रणाली IRCTC के माध्यम से की जाती है। सरकार का कहना था कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल है और निर्धारित नियमों के तहत टिकट जारी किए जाते हैं। प्रशासन ने दावा किया था कि किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर जांच की जाती है और व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बहरहाल, मनोज रावत ने अपनी फेसबुक पोस्ट में पंचकेदारों में शामिल तुंगनाथ धाम और चोपता क्षेत्र की अव्यवस्थाओं को उठाया। अव्यवस्थाओं के लिए उन्होंने रुद्रप्रयाग के जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे की निष्क्रियता को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा जिला पर्यटन अधिकारी साल में छः महीने हैली का काम देखते हैं।

उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से हैली सेवा से जुड़े कथित लेनदेन की ओर इशारा किया और कहा आरोप लगाया कि पर्यटन अधिकारी का काम ‘हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा’ वाला है।

पूर्व विधायक यहीं तक नहीं रुके। उन्होंने पर्यटन अधिकारी के व्यवहार पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हेली में देश भर के बड़े लोगों की आवाजाही होती है। उनसे संपर्क के कारण उनका मिजाज और व्यवहार प्रदेश के पर्यटन सचिव से भारी हो जाता है।

उन्होंने कहा कि चोपता को उत्तराखंड का “स्विट्जरलैंड” कहा जाता है, लेकिन वहां कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं है, जबकि प्रतिदिन 10 हजार से अधिक तीर्थयात्री और पर्यटक यहां से गुजरते हैं।

उन्होंने कहा कि ऊखीमठ से मंडल मार्ग के बीच भी सार्वजनिक शौचालय नहीं हैं। वहीं, चोपता से तुंगनाथ तक 3.4 किलोमीटर पैदल मार्ग पर भी कोई शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं है। तुंगनाथ में दशकों पुराना शौचालय है, जो कपाट खुलने के दूसरे दिन तक भी साफ नहीं हो पाया था।

रावत ने आरोप लगाया कि चोपता क्षेत्र में वन विभाग विकास कार्यों में बाधा बन रहा है। उन्होंने कहा कि यदि राजस्व ग्रामों की सीमाएं तय हो जाएं तो SDM स्तर से शौचालय निर्माण की अनुमति दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि देश के अन्य अभयारण्यों में शौचालय हैं, तो तुंगनाथ घाटी में ऐसी सुविधाएं क्यों नहीं बन सकतीं।

मनोज रावत ने कहा कि जिला पर्यटन अधिकारी ने आज तक चोपता की समस्याओं को लेकर कोई अंतर्विभागीय बैठक बुलाने का प्रयास नहीं किया होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अब इस मुद्दे को छोड़ा नहीं जाएगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मामले का संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कई बार चोपता का जिक्र कर चुके हैं। इसलिए अब उन्हें इसकी फिक्र भी करनी चाहिए।

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