बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामला: सुप्रीम कोर्ट 2 दिसंबर को सुनाएगा फैसला, प्रशासन हाई अलर्ट पर

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लगभग 3,660 मकान और 5,236 परिवारों पर पड़ेगा प्रभाव
उत्तराखंड : नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट 2 दिसंबर को अपना निर्णय सुना सकता है। फैसले से पहले जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रेलवे अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठकें की जा चुकी हैं और क्षेत्र को सुरक्षा दृष्टि से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। खुफिया तंत्र को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, हल्द्वानी रेलवे स्टेशन की लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण आदेश आ सकता है। इस संभावित फैसले को देखते हुए बनभूलपुरा क्षेत्र में भारी पुलिस बल, आरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
वर्ष 2022 में रेलवे भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई थी। इसके बाद 2023 में हाईकोर्ट ने भूमि को खाली कराने के आदेश दिए थे। आदेश लागू करने की कोशिशों के दौरान स्थानीय निवासियों के विरोध के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। तब से मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में चल रही थी, और अब मंगलवार को कोर्ट अपने आदेश दे सकता है।
प्रशासन की तैयारी
एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्रा ने बताया कि संभावित फैसले को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है। आरपीएफ और जिला पुलिस द्वारा क्षेत्र में फ्लैग मार्च कर लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का जो भी निर्णय आएगा, उसे सभी को सम्मानपूर्वक स्वीकार करना चाहिए।
सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फरवरी 2024 की घटना फिर चर्चा में
गौरतलब है कि फरवरी 2024 में नजूल भूमि पर कथित अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बनभूलपुरा क्षेत्र में बड़ा तनाव देखने को मिला था। मदरसा ध्वस्तीकरण के दौरान भड़की हिंसा में बनभूलपुरा थाना आग के हवाले कर दिया गया था, पुलिस व अधिकारियों पर पथराव किया गया था और चार लोगों की मौत हुई थी। कई पुलिसकर्मी, अधिकारी और पत्रकार भी घायल हुए थे। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन को कर्फ्यू तक लगाना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले के मद्देनज़र, प्रशासन अब किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
