उपलब्धि : भारत में जन्मी मादा चीता ‘मुखी’ ने दिए पांच शावक, प्रोजेक्ट चीता को मिली बड़ी सफलता

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भारत के वन्य संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में जन्मी पहली मादा चीता मुखी ने पाँच शावकों को जन्म दिया है। यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की।

दो साल नौ महीने की उम्र में मुखी का यह पहला प्रसव है, जिसने भारत में चीतों की पुनर्स्थापना के प्रयासों को मजबूत आधार प्रदान किया है। मंत्री यादव ने इसे “ऐतिहासिक पल” बताते हुए कहा कि यह भारत में चीता आबादी को आत्मनिर्भर और जेनेटिकली विविध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भारत में जन्मे चीते द्वारा पहली बार सफल प्रजनन

यादव ने कहा कि हाल के इतिहास में यह पहला अवसर है जब भारत में जन्मा कोई चीता सफलतापूर्वक शावकों को जन्म देने में सक्षम हुआ है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय पर्यावरण चीतों के अनुकूल हो रहा है और यह प्रजाति यहां स्वस्थ रूप से आगे बढ़ने की क्षमता रखती है।

मां और शावक पूरी तरह सुरक्षित

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मुखी और उसके सभी पाँच शावक स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा, “यह सफलता भारत में आत्मनिर्भर, आनुवंशिक रूप से विविध और दीर्घकालिक चीता आबादी विकसित करने की उम्मीद को और मजबूत करती है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि न केवल प्रोजेक्ट चीता के भविष्य के लिए आशा बढ़ाती है, बल्कि भारत के संरक्षण प्रयासों पर वैश्विक स्तर पर विश्वास को भी और मजबूत करती है।

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