उत्तराखंड : धराली आपदा पर कर्नल कोठियाल का बयान, प्रदेश की राजनीति में तूफान

उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को आई भयावह जल–प्रलय के चार महीने बाद भी मलबे के नीचे दबे लोगों की संख्या और राहत–बचाव कार्यों पर सवालों का तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में भाजपा नेता और सेवानिवृत्त कर्नल अजय कोठियाल द्वारा दिए गए एक बयान ने राज्य की राजनीति में बबाल मचा दिया। कर्नल कोठियाल ने दावा किया कि “धराली में आज भी 147 लोग मलबे में दबे हुए हैं और वहां अगस्त के बाद कोई काम ही नहीं हुआ।”
यह बयान न सिर्फ सरकार के आपदा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, बल्कि इसलिए भी संवेदनशील है कि यह आरोप किसी विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि स्वयं भाजपा के भीतर मौजूद एक प्रमुख चेहरे—कर्नल कोठियाल—ने लगाए हैं।
उनके बयान का पहला वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक हलचल तेज हुई, और कुछ ही घंटों में कोठियाल द्वारा जारी एक और “सफाई वीडियो” ने इस विवाद को और गहरा कर दिया।
बवाल की शुरुआत
29 नवंबर 2025 को देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में आयोजित “वर्ल्ड समिट ऑन डिज़ास्टर मैनेजमेंट” में बोलते हुए कर्नल कोठियाल ने एक ऐसा दावा किया जिसने पूरे तंत्र को हिला दिया। उन्होंने कहा— धराली में 147 शव अब भी मलबे के नीचे दबे हैं। 5 अगस्त के बाद से वहां कोई ‘सार्थक’ काम नहीं हुआ। सरकार ने वैज्ञानिकों की दलील देकर रेस्क्यू रोक दिया।
कर्नल कोठियाल द्वारा बताई गई संख्या राज्य सरकार द्वारा घोषित मृतकों की संख्या से लगभग दुगुनी है। कोठियाल का दावा सही माना जाए, तो यह राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन की साख पर सीधा हमला है।
कांग्रेस का तीखा हमला: “सरकार की कलई खुल गई”
कर्नल कोठियाल के बयान को कांग्रेस ने हाथों-हाथ लिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा— “कर्नल कोठियाल ने भाजपा सरकार के आपदा प्रबंधन की पोल खोल दी है। डेढ़ सौ लोगों के शव मलबे में दबे हों और सरकार उस पर सड़क बनवा दे — यह अमानवीयता नहीं तो और क्या है?”
उन्होंने आगे कहा कि – कांग्रेस इस मामले में सरकार से विशेष जांच की मांग करेगी। कर्नल के बयान ने सरकारी दावों पर संदेह खड़ा कर दिया है। अगर सरकार ने सचमुच शवों की तलाश रोकी है, तो यह अपराध की श्रेणी में आता है।
भाजपा में असहजता: “आंकड़ा कहां से आया?”
कर्नल कोठियाल स्वयं भाजपा के नेता हैं। ऐसे में उनके बयान ने भाजपा संगठन को असहज कर दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा— हम कर्नल कोठियाल से पूछेंगे कि 147 लोगों के मलबे में दबे होने का आंकड़ा उन्हें कहां से मिला?
पार्टी प्रवक्ता और वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने भी कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी गंभीरता से विचार करेगी।
आपदा के 4 महीने: क्या वाकई रेस्क्यू कार्य रुका?
स्थानीय लोग बताते हैं कि – शुरुआती दिनों में सेना, SDRF, NDRF और स्थानीय टीमें लगातार तलाश में लगी रहीं। लेकिन भारी मलबे, लगातार भू–धंसाव और सुरंग जैसी संरचना बनने की वजह से आगे की खुदाई रोक दी गई।
लेकिन कोठियाल के बयान से सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने मलबे पर सड़क बनवाकर अंतिम खोज प्रयासों को हमेशा के लिए सील कर दिया? और क्या सरकार ने वास्तविक संख्या छिपाई?
“धराली में काम नहीं हुआ”— तो जिम्मेदार कौन?
कोठियाल के बयान के बाद उनका 10 अगस्त 2025 का सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आया। जिसमें उन्होंने लिखा था कि सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें ‘धराली में अपना प्रतिनिधि’ नियुक्त किया है और वे राहत–बचाव कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।
इस हिसाब से चार महीने बाद यदि: रेस्क्यू रुका, सड़क मलबे पर बन गई, शव नहीं निकाले गए, तो जिम्मेदार के रूप में कोठियाल की भूमिका को कैसे नकारा जा सकता है ? क्योंकि वे खुद मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में वहां गए थे।
सफाई वीडियो: क्या डैमेज कंट्रोल?
पहले वीडियो के वायरल होने के कुछ घंटों बाद कर्नल कोठियाल ने एक “सफाई वीडियो” जारी किया। इस वीडियो में – उनकी बॉडी लैंग्वेज बदली हुई दिखी। वे कई जगहों पर रक्षात्मक नजर आए। वे बोल रहे थे कि “मैंने तो किसी राजनीतिक मंच से कुछ नहीं कहा…”
कोठियाल ने कहा कि – उन्होंने केवल वाइब्रेंट विलेज, पीएम मोदी के ‘प्रथम गांव’ और विकास मॉडल पर बात की थी। विपक्ष वीडियो का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।
हालांकि उन्होंने 147 शवों की संख्या वापस नहीं ली और “काम नहीं हुआ” वाला दावा वापस नहीं लिया। इसलिए उनकी यह सफाई और भी सवाल खड़े करती है।
राजनीतिक पटल पर ‘यू-टर्न कोठियाल’ की चर्चा
यह पहली बार नहीं है जब कर्नल कोठियाल पर यू-टर्न लेने के आरोप लगे हों। 2022 चुनाव: AAP के मुख्यमंत्री चेहरे थे, धामी सरकार की कड़ी आलोचना करते थे। कुछ कर धामी कहकर मुख्यमंत्री धामी पर कटाक्ष करते थे। उन्होंने गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र से आप पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और अपनी जमानत भी जब्त करवा बैठे।
चुनाव बाद वे BJP में शामिल हो गए और धामी सरकार ने उन्हें उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया।
कर्नल कोठियाल और केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य फिर चर्चा में
कोठियाल के बयान के बाद जहां वो चर्चाओं में हैं, वहीं केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों पर भी चर्चा हो रही है। वर्ष 2013 की केदारनाथ त्रासदी के बाद कर्नल कोठियाल को धाम के पुनर्निर्माण का जिम्मा मिला था। तब कुछ लोगों द्वारा उन्हें ‘आधुनिक भगीरथ’ तक कहा गया था। लेकिन बाद में उन पर कई आरोप भी लगे और पुनर्निर्माण के कामों में अनियमितताओं की शिकायतें भी हुईं थी। ख़ास कर भाजपा के नेता अजेंद्र अजय ने पुनर्निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए थे।
आज जब वे धराली पर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, तब यह पुराने संदर्भ दोबारा चर्चा में आ रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक कोठियाल के बयान को उत्तराखंड भाजपा की अंदरूनी खींचतान से जोड़ कर देख रहे हैं।
