गढ़वाल में बढ़ते वन्यजीव आतंक के बीच एक गुलदार मार गिराया गया

पौड़ी जनपद के गजेल्ड गांव में आतंक मचा रहे नर-भक्षी गुलदार को आखिरकार ढेर कर दिया गया है। पिछले कुछ सप्ताह से ग्रामीणों में दहशत फैला देने वाले इस गुलदार को मार गिराने के लिए वन विभाग ने विशेष शिकारियों की टीम तैनात की थी। टीम लंबे समय से इलाके की लगातार निगरानी और ट्रैकिंग कर रही थी। बुधवार देर रात सघन अभियान के दौरान शिकारी दल ने गुलदार को सफलतापूर्वक मार गिराया।
स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे क्षेत्र में गश्त और सतर्कता बढ़ा रखी थी। गांव के आसपास कई दिनों से दिखाई दे रहे इस खतरनाक गुलदार ने मवेशियों पर भी हमले किए थे, जिससे तनाव और भय का माहौल बन गया था। गुलदार के मारे जाने के बाद क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है।
गढ़वाल मंडल में भालू–गुलदार का बढ़ता आतंक: लगातार चुनौतियां
गजेल्ड गांव की घटना कोई नई नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों—पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी और चमोली—में भालू और गुलदार के हमले तेज़ी से बढ़े हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी इलाकों में मानव गतिविधि बढ़ने, जंगलों के सिमटने और वन-पथिक मार्गों पर बदलाव के चलते मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है।
कुछ प्रमुख तथ्य:
- पिछले वर्षों में गढ़वाल क्षेत्र में गुलदार और भालू के हमले 20–30% तक बढ़े माने जाते हैं।
- कई इलाकों में गुलदारों की village-entry (गांव में प्रवेश) घटनाएं बढ़ी हैं। निवासी शाम के बाद बाहर निकलने से बचते हैं।
- रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी में भालुओं द्वारा अचानक हमला करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
- कई मामलों में ग्रामीणों के मवेशी गुलदार का शिकार बनते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान अलग से होता है।
- विशेषज्ञों के मुताबिक बदलते मौसम, भोजन की कमी और वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्गों के बाधित होने से संघर्ष और बढ़ रहा है।
वन विभाग की रणनीति और भविष्य की तैयारी
वन विभाग ने बताया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में
- ड्रोन निगरानी,
- कैमरा ट्रैप,
- चेतावनी सायरन,
- और फॉरेस्ट रैपिड रिस्पॉन्स टीमों
की तैनाती बढ़ाई जा रही है।
साथ ही ग्रामीणों को सुरक्षा उपायों—जैसे समूह में चलना, बच्चों को अकेला न छोड़ना, और रात्रिकालीन गतिविधियों से बचने—के लिए जागरूक किया जा रहा है।
वन विभाग का कहना है कि गजेल्ड गांव में गुलदार को मार गिराने की घटना एक तत्काल समाधान है, लेकिन दीर्घकालिक तौर पर मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वैज्ञानिक और योजनाबद्ध कदम उठाना आवश्यक है।
