QR कोड मामले में सूचना आयोग सख्त, बदरीनाथ कोतवाली के PIO को चेतावनी

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एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तराखंड सूचना आयोग (Uttarakhand Information Commission) ने स्पष्ट किया है कि किसी प्रकरण का न्यायालय में विचाराधीन होना सूचना के अधिकार (RTI) में बाधा नहीं बन सकता। आयोग ने बदरीनाथ कोतवाली के लोक सूचना अधिकारी (PIO) को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में कोर्ट में मामला लंबित है जैसे बहानों के आधार पर सूचना उपलब्ध कराने से इनकार न किया जाए।

राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद ने एक अपील की सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा कि यदि किसी मामले में जांच पूरी हो चुकी है, तो केवल उसके न्यायालय से संबंधित होने के आधार पर सूचना रोकी नहीं जा सकती।

सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि —
यदि किसी प्रकरण में जांच अभी चल रही हो और सूचना देने से जांच या अभियोजन प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना हो, तभी सूचना रोकी जा सकती है।

आयोग ने कहा कि RTI अधिनियम की धारा 8 के तहत केवल उन्हीं सूचनाओं को रोका जा सकता है—

  • जिनके प्रकाशन पर किसी न्यायालय या अधिकरण ने स्पष्ट रोक लगाई हो
  • जिनके प्रकटन से न्यायालय की अवमानना होती हो
  • जिनसे अपराधियों की जांच, गिरफ्तारी या अभियोजन प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती हो

    यह मामला वर्ष 2023 में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में लगाए गए QR कोड से जुड़ा है। इन QR कोड के माध्यम से श्रद्धालुओं से दान की अपील की जा रही थी, जिसे लेकर बाद में विवाद उत्पन्न हुआ। विवाद के बाद श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने अपने स्तर से तथ्यों की छानबीन कर प्रकरण में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए बदरीनाथ थाने में FIR दर्ज करवाई थी।

    सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मोहन सेमवाल ने इस मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत चमोली पुलिस से छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। उन्होंने BKTC द्वारा दर्ज कराई गई FIR पर हुई कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा था।

    बदरीनाथ कोतवाली के प्रभारी ने बतौर लोक सूचना अधिकारी सेमवाल के द्वारा मांगी गई सूचनाओं में से केवल एक बिंदु की सूचना के रूप में FIR की कॉपी उपलब्ध कराई। जबकि बाकी सूचनाओं के लिए यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

    इस जवाब से असंतुष्ट होकर सेमवाल ने पहले पुलिस उपाधीक्षक, चमोली के समक्ष प्रथम अपील दायर की। वहां से भी संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।

    राज्य सूचना आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद बदरीनाथ कोतवाली के लोक सूचना अधिकारी के रवैये को RTI कानून के विरुद्ध माना और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी दी।

    आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में जांच कार्रवाई पूर्ण हो चुकी है तो ऐसे में न्यायालय का बहाना बना कर सूचना रोके जाने का कोई औचित्य नहीं था।

    QR कोड मामले में सूचना आयोग के फैसले पर बीकेटीसी के तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे स्वागतयोग्य बताया। उन्होंने चमोली पुलिस के रवैये पर असंतोष जताते हुए कहा कि पुलिस ने शुरू से ही इस मामले में ढीला रुख अपनाया।

    अजेंद्र ने कहा कि जैसा कि RTI के माध्यम से यह तथ्य भी सामने आया है कि पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है। उन्होंने कहा कि मामले की फिर से उच्चस्तरीय जांच जरुरी है। वे स्वयं मुख्यमंत्री को जांच के बावत पत्र भी लिखेंगे।

    यह आदेश न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में RTI आवेदकों और लोक सूचना अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर है। आयोग का यह स्पष्ट संदेश है कि पारदर्शिता से बचने के लिए न्यायालय का हवाला नहीं दिया जा सकता।

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