BKTC : दुष्प्रचार पर सख्ती, अव्यवस्थाओं पर चुप्पी, CEO नियुक्ति में फिर सवाल

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विगत दिवस उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग रील बना कर चारधाम यात्रा के बारे में दुष्प्रचार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी का यह आरोप कुछ हद तक सही कहा जा सकता है। वास्तव में यात्रा के नाम पर आज ब्लॉगर्स, यूट्यूबर आदि की एक ऐसी जमात पैदा हो गई है, जो अपने व्यूज और लाइक्स पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तत्पर हैं।

केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू होने पर जिस प्रकार से वहां के नकारात्मक वीडियो व रील वायरल हुए, उससे प्रदेश सरकार की जमकर छीछालेदर हुई। आनन-फानन में सरकार ने धड़ाधड़ कई लोगों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए। सरकार द्वारा मुकदमे दर्ज किये जाने और सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसी सामग्री हटाने संबंधी STF की ओर से पत्र भेजे जाने का मुद्दा सोशल प्लेटफॉर्म “X” पर चर्चा का विषय भी बना।

प्रदेश सरकार को हक है कि वो अपनी छवि को लेकर फिक्रमंद रहे और झूठा व दुष्प्रचार करने वालों के विरुद्ध कानूनी उपाय करे। मगर सरकार की भूमिका इतने पर ही खत्म नहीं हो जाती है। सरकार को चारधाम यात्रा में जो कमियां हैं उन पर कानून के बल पर पर्दा डालने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। अपितु खामियां को दुरुस्त भी करना चाहिए।

व्यवस्थाएं कैसे सुदृढ़ होंगी ? उत्तराखंड के चार धामों में से दो प्रमुख धामों बदरीनाथ व केदारनाथ मंदिरों की व्यवस्था श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के जिम्मे है। मगर बीकेटीसी का प्रशासन भगवान भरोसे चल रहा है। प्रदेश सरकार ने बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) को लेकर कई तरह के प्रयोग कर डाले हैं।

वर्ष 2023 में गठित बीकेटीसी के कार्मिकों की सेवा नियमावली में सीईओ पद के लिए अन्य बातों के साथ 6600 ग्रेड पे का प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी होने की अनिवार्य शर्त रखी थी। इस शर्त के अनुसार इस पद पर वरिष्ठ PCS अथवा कनिष्ठ IAS अधिकारी की तैनाती होनी थी।

मगर सेवा नियमावली के प्रदेश कैबिनेट से पारित होने के कुछ समय बाद सरकार ने खुद इसकी धज्जियां उड़ा दीं और मंडी समिति के एक बाबू कैडर के कार्मिक विजय थपलियाल को सीईओ पद की जिम्मेदारी सौंप दी। थपलियाल प्रथम श्रेणी तो दूर द्वितीय श्रेणी के भी राजपत्रित अधिकारी नहीं थे।

विवादों के बाद इस वर्ष मार्च माह में सरकार ने थपलियाल को सीईओ पद से हटाते हुए उनके मूल विभाग मंडी परिषद में वापस भेज दिया। बताया जाता है कि अप्रैल माह में यात्रा के शुरू होने के दृष्टिगत शासन ने सीईओ पद के लिए अधिकारीयों की खोजबीन की। मगर वर्तमान में बीकेटीसी में जिस प्रकार के हालात बने हुए हैं, उसमें किसी ने भी वहां जाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

आनन-फानन में शासन ने 27 मार्च को रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी को सीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। जिलाधिकारी के पास इतने काम होते हैं कि वो सीईओ की जिम्मेदारी को कितनी कुशलता से निभा पाएंगे, इस पर पहले से ही संशय बना हुआ था।

आखिरकार एक माह से कुछ अधिक समय बाद सरकार ने यात्रा शुरू होने के बाद रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी से सीईओ का अतिरिक्त प्रभार हटा दिया और कर्णप्रयाग के उप जिलाधिकारी सोहन सिंह रांगड़ की सीईओ पद पर नियुक्ति कर दी।

रांगड़ की नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। रांगड़ पदोन्नति के फलस्वरूप PCS अधिकारी बने हैं। उनका ग्रेड पे 5400 है। इस ग्रेड पे के अनुसार उन्हें बीकेटीसी में अपर मुख्य कार्याधिकारी (ACEO) के पद पर तैनाती दी जा सकती थी। मगर सीईओ पद पर 6600 ग्रेड पे का अधिकारी ही नियुक्त हो सकता है।

वर्तमान में बीकेटीसी में ACEO का पद भी रिक्त है। समान ग्रेड पे के अधिकारी के सीईओ पद पर तैनाती के बाद ACEO पद पर किसी अन्य की नियुक्ति आसान नहीं होगी।

इसका सीधा असर बीकेटीसी के प्रशासनिक कामकाज पर पड़ना स्वाभाविक है। वैसे भी वर्तमान में बीकेटीसी उप मुख्य कार्याधिकारी, अधिशासी अधिकारी (केदारनाथ), मंदिर अधिकारी जैसे प्रमुख पद रिक्त पड़े हुए हैं। जितनी तत्परता सरकार और बीकेटीसी वीडियो व रील बनाने वालों पर कार्रवाई करने में दिखा रही है, उतनी अगर इन पदों को भरने में दिखाई होती तो शायद अव्यवस्थाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता था।

यही नहीं बदरीनाथ धाम में पूर्णकालिक धर्माधिकारी समेत वेदपाठियों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। बीकेटीसी द्वारा इन पदों पर इधर-उधर से कार्मिकों को संबद्ध किया गया है। इसलिए वो स्थायी नियुक्ति प्रक्रिया को टालने में लगी हुई है।

उप मुख्य कार्याधिकारी, अधिशासी अधिकारी (केदारनाथ) आदि जैसे पद विभागीय प्रोन्नति के पद हैं। इन पदों को भरने में भी बीकेटीसी कोई रूचि नहीं दिखा रही है। बीकेटीसी द्वारा इस वर्ष यात्रा ड्यूटी में कार्मिकों की मनमाने तरीके से की गई ट्रांसफर पोस्टिंग के कारण भी कई तरह की व्यवहारिक दिक्क्तें पैदा हो रही

सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में बीकेटीसी में अंदरूनी गुटबाजी भी चरम पर पहुंच गई है। इस कारण कई मामलों में निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। विगत कुछ माह पूर्व बीकेटीसी ने रिक्त पड़े कुछ पदों के लिए प्रतिनियुक्ति व संविदा पर तैनाती के लिए समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशित की थी। विज्ञप्ति के प्रकाशन के बाद कर्मचारी संगठन खुल कर इसके विरोध में आ गया था। उनकी मांग थी की पहले कार्मिकों की पदोन्नति की प्रक्रिया सम्पन्न की जाए।

तब बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती भी कर्मचारियों के पक्ष में उतर आये थे और उन्होंने प्रतिनियुक्ति व संविदा पर नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए बाकायदा पत्र भी लिखा था। उसके बाद से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।

बीकेटीसी के पदाधिकारियों में आपसी सर-फुटोब्बल की चर्चाएं आम हैं। अभी विगत दिन बदरीनाथ धाम में कार्यालय खोलने को लेकर दो पदाधिकारियों के बीच हुई तनातनी के प्रकरण पर कर्मचारी व तीर्थ-पुरोहित खूब चटकारे ले रहे हैं।

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