BKTC नियुक्ति विवाद : उपाध्यक्ष सती खुल कर आए कार्मिकों के पक्ष में, CEO को दिया निर्देश – नियुक्तियां करो निरस्त

BKTC-PRESIDENT

बीकेटीसी अध्यक्ष द्विवेदी व उपाध्यक्ष सती

श्री बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में रिक्त पड़े विभिन्न पदों को प्रतिनियुक्ति और संविदा के माध्यम से भरे जाने की प्रक्रिया पर विवाद बढ़ता जा रहा है। बीकेटीसी कर्मचारी संघ द्वारा इन नियुक्तियों के विरोध में झंडा बुलंद किया गया है। इस बाबत कर्मचारी संघ ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी समेत उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती को भी पत्र लिखा है।

कर्मचारी संघ के विरोध के बाद बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती खुल कर कर्मचारियों के पक्ष में उतर आए हैं। सती ने कर्मचारी संघ के ज्ञापन पर कार्रवाई करते हुए सीधा मुख्य कार्याधिकारी (CEO) को पत्र लिखा है। अपने पत्र में सती ने कर्मचारी संघ के ज्ञापन का हवाला देते हुए CEO को निर्देशित किया है कि संविदा व प्रतिनियुक्ति से भरे जाने वाले पदों के संबंध में जारी विज्ञप्ति तत्काल निरस्त करें और कर्मचारियों द्वारा उठाई गई मांगों पर कार्रवाई करें।

गौरतलब है कि बीकेटीसी द्वारा हाल ही में एक विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें विभिन्न पदों पर प्रतिनियुक्ति और संविदा के माध्यम से नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किये गए हैं। बीकेटीसी के सूत्रों का आरोप है कि संविदा और प्रतिनियुक्ति के माध्यम से अपने चहेतों को घुसाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि, इन पदों के लिए योग्य दावेदार बीकेटीसी में मौजूद हैं। बीकेटीसी के कार्मिक इन पदों के लिए अहर्ता न रखें, इसलिए कर्मचारियों की पदोन्नति और एसीपी को लंबित रखा जा रहा है।

उपाध्यक्ष सती के कर्मचारियों के पक्ष में खुल कर सामने आने और नियुक्तियों निरस्त करने के निर्देश दिए जाने को बीकेटीसी में अंदरखाने चल रही गुटबाजी से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कार्मिकों में बीकेटीसी अध्यक्ष की कार्यशैली को लेकर भारी नाराजगी है। कर्मचारी संविदा और प्रतिनियुक्ति वाले मामले में शांत बैठने को तैयार नहीं हैं। उपाध्यक्ष सती का साथ मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है।

हेमंत द्विवेदी के अध्यक्ष पद पर नियुक्त होने के बाद से बीकेटीसी लगातार विवादों में है। द्विवेदी की कार्यशैली को लेकर गतवर्ष केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों ने झंडा खड़ा कर दिया था और प्रदेश सरकार से उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की थी। काफी मान-मनोवल के बाद तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा शांत हुआ था।

साल 2025 में ही द्विवेदी किसी उद्योगपति के साथ बिना अनुमति के हैलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम पहुंच गए थे। तब इस मामले में काफी हो- हल्ला मचा था। प्रदेश सरकार ने हैली कंपनी को कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।

उनके पिछले एक वर्ष के कार्यकाल में बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में साल 2024 के मुकाबले साढ़े तीन लाख यात्री ज्यादा आए। मगर 2024 के मुकाबले उनके कार्यकाल में आमदनी में साढ़े तेरह करोड़ रुपये की कमी आई। इससे बीकेटीसी के दान- चढ़ावे की व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

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