दून मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामला: नौ छात्र निलंबित, दो पर 50-50 हजार का जुर्माना, NMC ने भेजा नोटिस

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देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में सामने आए रैगिंग प्रकरण ने चिकित्सा शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। एंटी रैगिंग कमेटी की विस्तृत जांच के बाद कॉलेज प्रशासन ने कुल नौ छात्रों को दोषी ठहराते हुए कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इनमें से दो छात्रों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि अन्य छात्रों को निलंबन और हॉस्टल से निष्कासन जैसी सजा दी गई है।

जांच में दोषी पाए गए एमबीबीएस 2023 और 2024 बैच के दो छात्रों को कॉलेज प्रशासन ने हॉस्टल और इंटर्नशिप से हमेशा के लिए बाहर कर दिया है। इसके साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। कॉलेज प्राचार्य के आदेश पर यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि:

  • एक अन्य प्रकरण में सात छात्रों को हॉस्टल से तीन माह के लिए निष्कासित किया गया।
  • इनमें से कुछ छात्रों को एक से दो माह तक अकादमिक निलंबन भी झेलना पड़ेगा।
  • सीसीटीवी फुटेज और शिकायतकर्ताओं के बयानों के आधार पर दोष सिद्ध हुआ।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर रैगिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर और भी कड़ी कार्रवाई होगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दून मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी किया है। एनएमसी ने कॉलेज प्रशासन से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट और की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

कॉलेज प्रशासन ने बताया कि:

  • एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर
  • एनएमसी को औपचारिक जवाब भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
  • आयोग के साथ पूरा सहयोग किया जाएगा।

रैगिंग प्रकरण सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया है।

  • सभी हॉस्टलों में नियमित राउंड के निर्देश
  • सीसीटीवी कैमरों की सघन निगरानी
  • वार्डनों को छात्रों के व्यवहार पर पैनी नजर रखने के आदेश

प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने स्वयं हॉस्टलों का निरीक्षण कर छात्रों से संवाद किया और भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रकार की समस्या या शिकायत पर सीधे प्रशासन से संपर्क किया जा सकता है।

प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि प्रथम वर्ष (फर्स्ट ईयर) के छात्रों के लिए अलग हॉस्टल व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है, ताकि नए छात्रों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण मिल सके।

प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने कहा —

“इस मामले में दोषी छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। रैगिंग जैसी घटनाओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कॉलेज परिसर में अनुशासन और छात्रों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”