केदारनाथ के रावल द्वारा उत्तराधिकारी की घोषणा से विवाद, BKTC ने कहा रावल को नहीं नियुक्ति का अधिकार

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रावल भीमाशंकर लिंग

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख केदारनाथ मंदिर के रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा अपने उत्तराधिकारी की घोषणा किए जाने के बाद धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान की गई इस घोषणा पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने स्पष्ट किया है कि रावल की नियुक्ति एक वैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है और समिति को इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

विगत दिनों महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित धार्मिक आयोजन के दौरान रावल भीमाशंकर लिंग ने अपने शिष्य केदार लिंग को उत्तराधिकारी घोषित करने की बात कही। कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच यह घोषणा चर्चा का विषय बन गई। हालांकि इस घोषणा के तुरंत बाद नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे।

मंदिर समिति के अनुसार रावल की नियुक्ति बदरीनाथ-केदारनाथ अधिनियम 1939 के प्रावधानों के अंतर्गत की जाती है। अधिनियम के अनुसार रावल की नियुक्ति का अधिकार समिति के पास है।

समिति का कहना है कि— वर्तमान रावल के त्याग पत्र के बाद ही इस पर विचार किया जायेगा। उत्तराधिकारी चयन के लिए औपचारिक प्रस्ताव आवश्यक होता है। समिति द्वारा परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। मगर अब तक रावल की ओर से कोई औपचारिक पत्र या संस्तुति समिति को प्राप्त नहीं हुई है।

परंपरा के अनुसार केदारनाथ धाम के रावल कर्णाटक के वीरशैव लिंगायत समुदाय से होते हैं। रावल द्वारा अपने उत्तराधिकारी के नाम का संकेत दिए जाने की परंपरा रही है, लेकिन अंतिम निर्णय मंदिर समिति की स्वीकृति के बाद ही मान्य होता है।

ऐसे में धार्मिक परंपरा और वैधानिक प्रक्रिया के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

अपने उत्तराधिकारी के चयन के मुद्दे पर महाशिवरात्रि को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा हक- हकूकधारियों के साथ रखी गयी बैठक में तीखी बहस की बात सामने आई है। इस बैठक का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें रावल भीमाशंकर लिंग काफी आक्रामक तेवरों के साथ दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि भीमाशंकर लिंग वर्ष 2000 में केदारनाथ धाम के रावल नियुक्त किए गए थे। उनकी नियुक्ति के समय भी काफी विवाद हुआ था। वे पिछले 25 वर्षों से इस महत्वपूर्ण धार्मिक दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों व परम्पराओं के तहत से की जाएगी। यदि कोई प्रस्ताव आता है तो उस पर अधिनियम और परंपराओं के अनुरूप विचार किया जाएगा।

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