चारधाम यात्रा से पहले बड़ा सवाल: BKTC को नहीं मिल रहा पूर्णकालिक CEO !

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बदरीनाथ व केदारनाथ धाम, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, यात्रा से पहले एक बड़े प्रशासनिक संकट से जूझ रहे हैं। इस वर्ष की यात्रा को शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं और धामों का संचालन करने वाली श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति(BKTC) में अभी तक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति नहीं हो पाई है।

बदरी-केदार की यात्रा धार्मिक आस्था के साथ ही उत्तराखंड की आर्थिकी का एक महत्वपूर्ण आधार भी है। मगर बीकेटीसी में सीईओ पद पर कामचलाऊ व्यवस्था और अन्य अधिकारियों के पद रिक्त होने से धामों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शासन ने विगत दिनों बीकेटीसी के सीईओ पद पर तैनात मंडी परिषद के सचिव विजय थपलियाल को हटा कर अग्रिम आदेशों तक रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी को सीईओ पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है।

राज्य सरकार प्रबंधन से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए बीकेटीसी में सीईओ के रूप में अपने प्रतिनिधि की तैनाती करती है। आमतौर पर शासन द्वारा उत्तर प्रदेश के समय से ही BKTC में सीईओ के रूप में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती रही है। शासन द्वारा कई आईएएस अधिकारियों की भी इस पद पर तैनाती की जाती रही है।

वर्ष 2023 में बीकेटीसी में कार्मिकों के लिए पहली बार सेवा नियमावली का गठन किया गया। नियमावली में सीईओ पद के लिए अहर्ता प्रशासनिक अनुभव के साथ 66,00 ग्रेड पे का प्रथम श्रेणी का राजपत्रित अधिकारी होना अनिवार्य किया गया। इस लिहाज से सीईओ पद पर वरिष्ठ पीसीएस अथवा कनिष्ठ आईएएस अधिकारी की नियुक्ति होनी है।

मगर करीब डेढ़ वर्ष पूर्व शासन ने सेवा नियमावली की धज्जियां उड़ाते हुए मंडी समिति के सचिव विजय प्रसाद थपलियाल को सीईओ पद पर आश्चर्यजनक रूप से तैनाती दे दी। थपलियाल प्रथम श्रेणी तो बहुत दूर, द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी भी नहीं थे। थपलियाल के कार्यकाल में विवादों के बाद शासन ने विगत दिनों उन्हें हटा दिया।

थपलियाल को हटाने के बाद कई दिन तक शासन बीकेटीसी में सीईओ की तैनाती नहीं कर पाया। बताया जा रहा है कि काफी माथा-पच्ची के बाद भी शासन को सीईओ पद के लिए कोई उपयुक्त नाम नहीं मिल पाया। शासन के सूत्रों के अनुसार वर्तमान में बीकेटीसी में जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उसको देखते हुए कोई भी अधिकारी इस पद पर अपनी तैनाती नहीं चाह रहा है। लिहाजा, शासन ने आगामी यात्रा को देखते हुए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी को अग्रिम आदेशों तक सीईओ पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया है।

शासन द्वारा सीईओ पद पर जिस प्रकार के प्रयोग किए जा रहे हैं, वह चिंताजनक ही नहीं हैं, बल्कि इन विश्व प्रतिष्ठित धामों के प्रबंधन व प्रशासन को लेकर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। वर्ष 2012 में प्रदेश सरकार ने प्रांतीय वन सेवा के अधिकारी बीडी सिंह को प्रतिनियुक्ति पर सीईओ के पद पर तैनाती दी। सिंह करीब दस वर्षों तक इस पद नियमविरुद्ध तरीके से डटे रहे। उनके कार्यकाल के दौरान कई तरह के विवाद चर्चाओं में रहे हैं।

भ्रष्टाचार के मुद्दों पर मुखर रहने वाले सोशल एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने एक वक्तव्य में सरकार द्वारा “कामचलाऊ व्यवस्था” के तहत रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी को CEO की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बीकेटीसी में केवल सीईओ पद ही नहीं, एडिशनल सीईओ, डिप्टी सीईओ, कार्याधिकारी (केदारनाथ) जैसे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद भी रिक्त हैं। ऐसे में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी अकेले इस दोहरी जिम्मेदारी को कैसे संभालेंगे?

उन्होंने कहा कि सरकार ने पार्टी नेताओं को एडजस्ट करने के लिए आनन-फानन में मंदिर एक्ट में संशोधन कर उपाध्यक्ष के दो पद सृजित किए और उन पर नियुक्ति कर दी। मगर प्रशासनिक रिक्तियों को भरने में गंभीरता नहीं दिख रही।

उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम जनपद चमोली में है। यात्राकाल में जिले के अंदर तमाम व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालने वाले जिलाधिकारी के लिए क्या यह संभव होगा कि वे रुद्रप्रयाग छोड़ कर इतनी दूर बदरीनाथ पहुंचे?

अधिवक्ता नेगी ने बताया कि उनके द्वारा सूचना अधिकार के तहत बीकेटीसी बोर्ड बैठकों के प्रस्ताव की जानकारी ली गई थी। बीकेटीसी ने 9 जुलाई 2025 की बैठक में सीईओ की अर्हताओं में संशोधन का प्रस्ताव पारित किया है। इसमें वर्ष 2023 की सेवा नियमावली में निर्धारित प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी की अनिवार्यता को “एकांगी” और “अनुकूल नहीं” बताते हुए हटाने की बात कही गई। बोर्ड ने तर्क दिया कि पहले 1985 की नियमावली में केवल सीईओ पद के लिए मात्र स्नातक डिग्री की अहर्ता पर्याप्त है।

उन्होंने कहा कि देश के अन्य प्रमुख श्राइन बोर्डों में आईएएस अधिकारियों को सीईओ बनाया जाता है ताकि प्रबंधन चुस्त-दुरुस्त रहे। उन्होंने बीकेटीसी बोर्ड पर आरोप लगाया कि वह इन धामों में मात्र स्नातक डिग्रीधारी को सीईओ बनाना चाहता है, जो प्रशासनिक गड़बड़ी पैदा कर सकता है।

उन्होंने बोर्ड के एक अन्य प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें विशेष पूजाओं के लिए न्यूनतम 11 लाख रुपये प्रति पूजा की दर निर्धारित करने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड का यह प्रस्ताव धार्मिक स्थलों में व्यावसायिकता को बढ़ावा देने वाला है।