अजब-गजब : हेमंत द्विवेदी को हटाने की मांग करने वाले पुरोहित बने BKTC में सदस्य

kedarnath_badarinath

विगत वर्ष यात्रा काल के दौरान श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को पद से हटाने की मांग करने वाले तीर्थ पुरोहितों के संगठन केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी समेत एक अन्य तीर्थ पुरोहित को समिति का विशेष आमंत्रित सदस्य (Co-Opted member) नियुक्त किया गया है। बीकेटीसी ने मंदिर समिति एक्ट के विपरीत शासन को ताक पर रख कर अपने स्तर से ये नियुक्तियां की हैं।

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी द्वारा 26 फरवरी के आदेश में कहा गया है कि श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939 (यथा संशोधित) की धारा -26 की उपधारा – 2 (g) में प्रदत्त व्यवस्था के अनुरूप राजकुमार तिवारी व रजनीश प्रसाद भट्ट को अनुमेलित सदस्य (Co-Opted member) के रूप में नामित किया जाता है।

इस पत्र के सार्वजनिक होते ही एक बार फिर बीकेटीसी विवादों के घेरे में आ गयी है और उस पर लगातार नियम-कानूनों को ताक पर रखने के आरोप लगने लगे हैं। इन सदस्यों के नियुक्ति पत्र में जिस धारा का उल्लेख किया गया है, उसकी मन-मुताबिक व्याख्या करने से बीकेटीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि मंदिर समिति एक्ट की धारा – 26 राज्य सरकार को बीकेटीसी के संबंध में नियम बनाने की शक्ति प्रदान करती है। इस धारा में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार मंदिर समिति अधिनियम के किन- किन प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। अर्थात इन नियमों के अंदर यह तय किया जाता है कि मंदिर समिति क्या-क्या कर सकती है।

धारा-26 की उपधारा-2 (g) मंदिर समिति को दो ऐसे सदस्य नामित करने का अधिकार देती है, जिन्हें बीकेटीसी की किसी भी बैठक में मत देने का अधिकार नहीं होगा। मगर जिस धारा -26 की यह उपधारा है, उनके क्रियान्वयन के लिए पहले शासन नियम बनाएगा।

अर्थात मंदिर समिति एक्ट के अनुसार पहले प्रदेश सरकार नियम बनाएगी कि बीकेटीसी दो अनुमेलित सदस्यों का चयन किस प्रकार से करेगी अथवा उनके चयन का आधार क्या होगा आदि-आदि। उसके पश्चात ही बीकेटीसी उस नियम के अनुसार 2 लोगों को शामिल कर सकती है।

मगर बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी द्वारा जारी नियुक्ति पत्र में शासन के किसी पत्र अथवा आदेश का उल्लेख नहीं किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बीकेटीसी ने बिना शासन की अनुमति अथवा स्वीकृति के यह आदेश जारी कर दिया।

????????????

जानकारों के अनुसार अभी तक विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति शासन द्वारा ही की जाती रही है और उसके लिए बाकायदा अधिसूचना जारी की जाती रही है। यह पहला अवसर है जब बीकेटीसी ने अपने स्तर से ही सदस्य नामित कर दिए। जानकार इन नियुक्तियों को पूरी तरह से अवैधानिक मान रहे हैं।

मंदिर समिति एक्ट में दो अनुमेलित सदस्य नामित करने के बारे में शासन द्वारा नियम बनाने का उल्लेख तो है। मगर बीकेटीसी के अधिकारों के बारे स्पष्टता नहीं है। मंदिर समिति एक्ट की धारा-25 में उपविधिया बनाने की बीकेटीसी की शक्तियों के बारे में बताया गया है। ये उपविधियां एक्ट के अधीन बनाए गए नियमों के संगत ही हो सकती हैं। इन उपविधियों में भी अनुमेलित सदस्य नामित करने के संबंध में कोई उल्लेख नहीं मिलता है।

एक बार के लिए यह मान भी लिया जाए कि बीकेटीसी ने दो सदस्य नामित करने के लिए अपने स्तर से कोई उपविधि बना भी डाली हो। मगर एक्ट के हिसाब से कोई भी उपविधि तक मान्य नहीं होगी, जब तक राज्य सरकार उसकी पुष्टि ना कर दे। राज्य सरकार की पुष्टि के बाद वह उपविधि सरकारी गजट में प्रकाशित होगी और उसका विधिक प्रभाव होगा।

बहरहाल, बीकेटीसी द्वारा नामित सदस्यों में से एक राजकुमार तिवारी की नियुक्ति को लेकर भी खासी चर्चा है। तिवारी केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित समाज की संस्था केदारसभा के अध्यक्ष हैं। उन्होंने विगत वर्ष बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की कार्यशैली पर रोष जताते हुए मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा था और उनको बीकेटीसी अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी। साथ ही द्विवेदी को नहीं हटाने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। तब काफी मान-मनोव्वल के बाद तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा शांत हुआ था। तिवारी को नामित करने के पीछे यही कारण माना जा रहा है।

इन अवैधानिक नियुक्तियों के बाद अब शासन के रुख पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद शासन कार्रवाई करेगा। प्रकरण पर BKTC के जिम्मेदार अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया। मगर किसी का फ़ोन नहीं उठा।

You may have missed