सफेद कोट के पीछे का दर्द: देहरादून में डॉक्टर छात्रा की मौत, एचओडी पर मुकदमा दर्ज

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राजधानी देहरादून में एक मेडिकल छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। Shri Guru Ram Rai Institute of Medical & Health Sciences (SGRR) के नेत्र रोग विभाग की एमएस की छात्रा डॉ. तन्वी (25) का शव बुधवार तड़के उनकी कार में मिला। परिजनों ने विभागाध्यक्ष पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। पटेल नगर पुलिस ने आरोपी एचओडी डॉ. प्रियंका गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, घटना बुधवार तड़के करीब तीन बजे की है। डॉ. तन्वी कारगी रोड क्षेत्र में अपनी कार के अंदर अचेत अवस्था में मिलीं। कार का शीशा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला गया। घटनास्थल से कार की सीट पर कई इंजेक्शन भी बरामद हुए। परिजन उन्हें तत्काल Shri Mahant Indiresh Hospital ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतका मूल रूप से हरियाणा के अंबाला की रहने वाली थीं और देहरादून में अपनी मां के साथ रह रही थीं। परिजनों के अनुसार, वह वर्ष 2023 से उक्त मेडिकल कॉलेज में एमएस (नेत्र रोग) की पढ़ाई कर रही थीं।

मृतका के पिता ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि दिसंबर 2025 तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन नई विभागाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद उनकी बेटी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। आरोप है कि विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका गुप्ता द्वारा डराने-धमकाने के साथ ही छात्रा को पुरानी विभागाध्यक्ष से संपर्क करने से रोका गया। पिता के अनुसार पुरानी एचओडी ने ही उन्हें सर्जरी सिखाई थी, इसलिए वह कभी-कभी उनसे बात कर लेती थीं।

परिजनों का आरोप है कि इसी द्वेष के चलते नई एचओडी ने डॉ. तन्वी को थिसिस में शून्य अंक दे दिए थे। इसके अलावा एचओडी पर पैसे मांगने का भी आरोप लगाया गया है।

मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने भी अपना पक्ष रखा है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि डॉ. तन्वी लंबे समय से मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं। दो वर्ष पहले भी उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया था। उनका उपचार चल रहा था। प्रबंधन ने डॉ. तन्वी की असमय मौत पर संवेदना व्यक्त की है।

प्रमोद शाह, एसएसआई, कोतवाली पटेलनगर ने बताया कि मृतका के पिता की तहरीर के आधार पर विभागाध्यक्ष डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस घटना के संबंध में जांच पड़ताल कर रही है। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल और मेडिकल कॉलेज से जुड़े तथ्यों को जांच में शामिल किया जा रहा है।

डॉ तन्वी के प्रकरण से मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल शिक्षा में बढ़ता प्रतिस्पर्धी माहौल, लंबी कार्य अवधि और अकादमिक दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। ऐसे मामलों ने संस्थानों में काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है।

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