अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड़: अज्ञात VIP पर CBI का मुकदमा, कनेक्शन खंगालेगी एजेंसी

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उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब एक बड़ा और अहम मोड़ आ गया है। इस मामले में सीबीआई की दिल्ली स्पेशल क्राइम ब्रांच (शाखा-2) ने अज्ञात वीआईपी व्यक्ति के खिलाफ दिल्ली में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही सीबीआई की टीम जांच के लिए देहरादून और ऋषिकेश पहुंच चुकी है, जहां वह साक्ष्य जुटाने और संबंधित लोगों से पूछताछ करेगी।

हालांकि इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी पुलकित आर्या समेत तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन जिस कथित वीआईपी का नाम लंबे समय से चर्चा में है, उसकी भूमिका को लेकर मामला अभी भी अधूरा माना जा रहा है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। हरिद्वार से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो और कथित ऑडियो क्लिप ने इस मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया।

इन ऑडियो- वीडियो में अंकिता प्रकरण में कथित VIP के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दुष्यंत कुमार गौतम और उत्तराखंड भाजपा के संगठन मंत्री अजेय कुमार का नाम लिया गया है। इन नामों का जिक्र होने के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन किए। कई सामाजिक संगठनों ने भी धरना-प्रदर्शन कर सीबीआई जांच की मांग की।

लगातार दबाव और अंकिता के माता-पिता की मांग के बाद 9 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण में सीबीआई जांच की संस्तुति दी थी। इसके बाद अब सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने पर्यावरणविद पद्यभूषण डॉ अनिल जोशी की तहरीर पर औपचारिक रूप से अज्ञात वीआईपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, सीबीआई जांच में डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल कॉल डिटेल्स, बैंकिंग लेन-देन, वायरल ऑडियो-वीडियो, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी प्रमाण की गहराई से जांच की जाएगी।

पौड़ी जनपद की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थी।
18 सितंबर 2022 को रिजॉर्ट में किसी बात को लेकर अंकिता का रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्या, उसके सहयोगी अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर से विवाद हो गया।

विवाद के बाद तीनों आरोपियों ने मिलकर अंकिता की हत्या कर दी और उसके शव को चीला नहर में फेंक दिया। बाद में पुलिस ने अंकिता का शव उसी नहर से बरामद किया।

घटना के बाद प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल एसआईटी का गठन किया। जांच के बाद पुलकित आर्या, अंकित गुप्ता व सौरभ भास्कर को गिरफ्तार किया गया और कोर्ट ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

हालांकि आरोपियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन

“अंकिता पर किस काम के लिए दवाब बनाया जा रहा था ?”
“वीआईपी का जिक्र क्यों आया?”
“क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका को नजरअंदाज किया गया?”

इन सवालों के जवाब अब सीबीआई जांच से ही सामने आने की उम्मीद है।