PM मोदी का प्रस्तावित देहरादून दौरा : अंकिता भंडारी मामले में VIP और CBI जांच पर उठा सवाल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 14 अप्रैल को प्रस्तावित देहरादून दौरे को लेकर उत्तराखंड में तैयारियां जोरों पर हैं। प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन इस दौरे को भव्य बनाने में जुटे हैं। शहर को सजाया जा रहा है और विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा अंतिम चरण में है।

प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान बहुप्रतीक्षित दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे और कई विकास योजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। साथ ही वे गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं।

इसी बीच, बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लंबे समय से सक्रिय ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ ने प्रधानमंत्री के दौरे से पहले कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

मंच से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता सुजाता पॉल ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में कहा कि प्रधानमंत्री जी उत्तराखंड आ रहे हैं। हम अतिथि देवो भव की अपनी संस्कृति के अनुरूप उनका स्वागत करते हैं। मगर एक बड़ा सवाल है कि देवभूमि में न्याय से बड़ा कोई स्वागत हो सकता है।

सुजाता पॉल ने सवाल उठाया कि यदि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जा रही है, तो कथित VIP चेहरे अब तक सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं आए।

उन्होंने कथित वीआईपी के रूप में चर्चा में आए भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम और प्रदेश संगठन मंत्री अजेय कुमार पर भी निशाना साधा।

उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि वे अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान स्वागत के मंच से एक बार जरूर बताएं कि अंकिता भंडारी केस में सीबीआई जांच कहां तक पहुंची ? आपने वीआईपी नामों पर क्या कार्रवाई की ? क्या ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर नहीं किया जाएगा ? उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगे। मगर उससे पहले हमें न्याय चाहिए।

अंकिता भंडारी हत्याकांड वर्ष 2022 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में सामने आया एक बहुचर्चित मामला है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया। अंकिता एक निजी रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थी और उसकी हत्या कर दी गयी थी। जांच में हरिद्वार के एक भाजपा नेता के पुत्र और रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य समेत तीन लोगों पर हत्या का आरोप लगा। मामले में ट्रायल कोर्ट ने पुलकित आर्य सहित अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब यह तथ्य सामने आया कि रिसॉर्ट में कथित तौर पर ‘वीआईपी मेहमान’ को एक्स्ट्रा सर्विस देने के लिए अंकिता पर दवाब बनाया गया था और विरोध करने पर उसकी हत्या की गई। इसे लेकर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और निष्पक्ष जांच की मांग उठी। लोगों ने सवाल उठाए कि क्या प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने भारी जनदवाब को देखते हुए करीब तीन माह पूर्व इस प्रकरण को दुबारा जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया।