मोदी ने दी दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर की सौगात, पर्यटन और उद्योग को मिलेगी रफ्तार

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देश के आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून में दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया। करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को सीधे जोड़ता है। इसके शुरू होने से तीनों राज्यों के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध यातायात सुनिश्चित होगा।

इस इकोनॉमिक कॉरिडोर को अत्याधुनिक तकनीकों और सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। परियोजना के तहत 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार बड़े पुल तथा यात्रियों की सुविधा के लिए 12 वे-साइड अमेनिटीज विकसित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, पूरे मार्ग पर उन्नत ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएम) लगाया गया है, जिससे यातायात संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारु रहेगा।

कॉरिडोर के निर्माण में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है। इस परियोजना में 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में शामिल है। इसके अलावा, आठ पशु मार्ग, 200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास तथा डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है।

इन प्रावधानों का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और मानव–वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करना है।

यह कॉरिडोर उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों—चारधाम, ऋषिकेश, हरिद्वार और मसूरी—तक पहुंच को आसान बनाएगा। इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली और सहारनपुर जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

सहारनपुर की लकड़ी नक्काशी और मुजफ्फरनगर के कागज उद्योग को भी इससे लाभ मिलेगा। साथ ही कृषि उत्पादों के त्वरित परिवहन से किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। परियोजना से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

गढ़ी कैंट स्थित जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों को बैसाखी और बिहू की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में चारधाम यात्रा शुरू होने वाली है और यह कॉरिडोर तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश में सड़कें राष्ट्र की ‘भाग्य रेखा’ बनती जा रही हैं, जो भविष्य की समृद्धि का आधार हैं। उन्होंने बताया कि बीते एक दशक में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश हुआ है और वर्तमान में यह आंकड़ा 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सरकार के निर्णय संविधान की भावना के अनुरूप हैं। उन्होंने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने को एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे पूरे देश को नई दिशा मिली है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड अब बारामासी पर्यटन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आदि कैलाश यात्रा का उदाहरण देते हुए बताया कि पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शीतकालीन पर्यटन को भी नई पहचान मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने देवभूमि की स्वच्छता बनाए रखने का आह्वान करते हुए पर्यटकों और स्थानीय लोगों से कचरा न फैलाने की अपील की। उन्होंने हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेले और नंदा देवी राजजात यात्रा का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। साथ ही उन्होंने ‘वन रैंक, वन पेंशन’ योजना का उल्लेख करते हुए पूर्व सैनिकों के सम्मान और उनके कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।