चारधाम यात्रा से पहले हलचल: राज्यपाल-सीएम सक्रिय, पर्यटन मंत्री गायब, कांग्रेस का धरना

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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है और इसकी तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। यात्रा व्यवस्था को लेकर गुरुवार को जहां राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने देहरादून में समीक्षा बैठक की, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुद्रप्रयाग जिले का दौरा कर जमीनी स्तर पर तैयारियों का जायजा लिया।
दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में सांकेतिक धरना देकर सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े किए।
राज्यपाल ने दिए सतर्कता और सेवा भाव के निर्देश
राजधानी देहरादून स्थित लोकभवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान राज्यपाल ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं के स्वागत, सेवा और आतिथ्य में कोई कमी न रहे, ताकि वे सुखद अनुभव के साथ लौटें।
राज्यपाल ने विशेष रूप से साइबर अपराधों—जैसे फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग, होटल धोखाधड़ी और ओवर रेटिंग—पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही आवश्यक सेवाओं की कीमतों में अनियमित वृद्धि करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा।
सीएम धामी ने केदारनाथ यात्रा मार्ग का किया निरीक्षण
विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा 22 अप्रैल से शुरू हो रही है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रुद्रप्रयाग पहुंचे और यात्रा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।
उन्होंने रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक सड़क मार्ग का दौरा कर पेचवर्क, झाड़ी कटान, साइनेज, क्रैश बैरियर, सुरक्षा उपाय और सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य यात्रा शुरू होने से पहले हर हाल में पूरे किए जाएं।
गुप्तकाशी में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ सौम्य व्यवहार रखने, हेलीपैड पर यात्री शेड की व्यवस्था करने और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में दवाइयों, पेयजल व फूड पैकेट उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस का हमला: तैयारियों पर उठाए सवाल
उधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में सांकेतिक धरना देते हुए सरकार पर यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का दौरा केवल आसान मार्ग—रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक—ही सीमित रहा, जबकि कठिन क्षेत्र गुप्तकाशी से गौरीकुंड तक का निरीक्षण नहीं किया गया।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि यह दौरा व्यवस्थाओं को सुधारने के बजाय “छवि चमकाने” के लिए किया गया है।
बीकेटीसी कर्मचारियों के मुद्दे पर भी उठी आवाज
गोदियाल ने बीकेटीसी (बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति) के अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने केदारनाथ उपचुनाव के दौरान कर्मचारियों को स्थायी करने की घोषणा की थी। मगर मुख्यमंत्री की घोषणा झूठी साबित हुई।
उन्होंने कर्मचारियों से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया और कानूनी सहायता देने का भरोसा भी दिलाया।
पर्यटन मंत्री की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री की सक्रियता के बीच प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अनुपस्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
वैशाखी के अवसर पर हरिद्वार स्थित अपने आश्रम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के अलावा उनकी सार्वजनिक सक्रियता हाल के दिनों में कम दिखाई दी है।
पिछले वर्षों में भी यात्रा के दौरान उनकी भूमिका सीमित रहने को लेकर चर्चा होती रही है। मुख्यमंत्री धामी जहां यात्राकाल में धामों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं, वहीं महाराज की सक्रियता नगण्य ही दिखाई देती रही है। आमतौर पर महाराज की सक्रियता मीडिया में बयानबाजी तक ही सीमित दिखती है।
आज मुख्यमंत्री के रुद्रप्रयाग दौरे के दौरान महाराज के अलावा बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बना रहा।
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